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सूर्यवंश और चंद्रवंश , - সূর্য বংশ ও চন্দ্র বংশের ইতিহাস।

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सूर्यवंश और चंद्रवंश  हिंदू पुराणों और इतिहासनुसार सूर्यवंश और चंद्रवंश दो प्रमुख राजवंश माने जाते हैं। इन दोनों वंशों से अनेक महान राजा, ऋषि और अवतारी पुरुष उत्पन्न हुए, जिन्होंने धर्म, सत्य और राज्यव्यवस्था की प्रतिष्ठा की। सूर्यवंश सूर्यवंश का उद्गम सूर्यदेव (विवस्वान) से माना जाता है। सूर्यदेव और संज्ञा के पुत्र वैवस्वत मनु इस वंश के मूल पुरुष हैं। मनु के पुत्र इक्ष्वाकु से इक्ष्वाकु वंश का प्रारंभ हुआ, जिसे आगे चलकर रघुवंश के नाम से भी जाना गया। प्रमुख राजा एवं महापुरुष: हरिश्चंद्र, सगर, भगीरथ, रघु, दशरथ, तथा भगवान श्रीराम राजधानी: अयोध्या सूर्यवंश को सत्य, मर्यादा और धर्मपालन का प्रतीक माना जाता है। चंद्रवंश चंद्रवंश का प्रारंभ चंद्रदेव (सोम) से माना जाता है। ऋषि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र चंद्र से बुध उत्पन्न हुए। बुध और इला से पुरुरवा का जन्म हुआ, जिनसे चंद्रवंश का विस्तार हुआ। इस वंश की अनेक शाखाएँ विकसित हुईं, जिनमें यदुवंश और पुरुवंश प्रमुख हैं। प्रमुख राजा एवं महापुरुष: ययाति, पुरु, यदु तथा भगवान श्रीकृष्ण चंद्रवंश का विस्तार सूर्यवंश की तुलना में अधिक व्यापक माना जा...

শ্রী শ্রী মা ষষ্ঠীদেবীর পূজা এবং তাঁর ধ্যান মন্ত্র,প্রণাম মন্ত্র ও ব্রত পালন ।

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ভগবান শ্রী শ্রী কার্তিকের ধর্মপত্নী দেবী দেবসেনা এবং দেবী বল্লী ।। মা ষষ্ঠীদেবী ।। ষষ্ঠী দেবী বা ষষ্ঠীঠাকুর হলেন  প্রজননের দেবী, দেবী ষষ্ঠী সন্তান দায়িনী,  তার কৃপায় নিঃসন্তান সন্তানবতী হ ন  এবং তিনিই সন্তানের রক্ষাকর্ত্রী মাতৃকা ,   তিনিই  সন্তান পালিনী দেবী , মঙ্গলদায়িনী প্রকৃতি। হিন্দু বর্ষ পঞ্জীর প্রতিমাসের  শুক্লাষষ্ঠী তিথিতে বিভিন্ন নামে ষষ্ঠীদেবী পূজিতা হন ।যেমন  জৈষ্ঠ মাসে: অরণ্যষষ্ঠী, শ্রাবণ মাসে: লুণ্ঠন বা লোটনষষ্ঠী, ভাদ্র মাসে :  মন্থনষষ্ঠী, আশ্বিন মাসে: দুর্গাষষ্ঠী বা বোধনষষ্ঠী, অগ্রহায়ণ মাসে: মূলাষষ্ঠী, পৌষ মাসে: পাটাইষষ্ঠী, মাঘমাসে   শীতলষষ্ঠী   বা   গোটাষষ্ঠী  বা শিলষষ্ঠী , চৈত্র মাসে: অশোকষষ্ঠী এবং নীলষষ্ঠী ইত্যাদি  । এছাড়া, শিশুর জন্মের দু'দিন পর 'সূতিকা ষষ্ঠী , ষষ্ঠ দিনে 'ঘাটষষ্ঠী', একুশদিনে ' একুশে ' এবং শিশুর বারো বছর বয়স পর্যন্ত প্রতি জন্মতিথিতে 'জল ষষ্ঠী' দেবীর পূজা  হয়ে থাকে। শীতল ষষ্ঠী  /শিলষষ্ঠী/ গোটাষষ্ঠী  :- মাঘ মাসে সরস্বতী...