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মুক্তি ,ভক্তি ও ষড়রিপু এবং মানব জীবনে ষড়রিপুর প্রভাব:ষড়রিপু কে নিয়ন্ত্রণ বা দমন করার উপায়।

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 আত্মা–পরমাত্মা–শান্তি। যথা গৃহজীবো ভ্রমিত্বা স্বগৃহং প্রত্যাগত্য শান্তিমাপ্নোতি। তথৈবাত্মা পরমাত্মগৃহং প্রত্যাগত্য পরাং শান্তিমবাপ্নোতি॥ অত্রাপি আত্মা স্বং কর্তব্যং কর্ম ধর্মং আচরিতুম্ অর্হতি। পরন্তু পরমাত্মনি সমাহিতে আত্মনঃ অনন্ত শান্তিমাপ্নোতি॥ মানবদেহমহিমা জ্ঞানিনঃ মতিঃ — মানবদেহঃ মন্দিরসমঃ।   তস্য তৃষু দিশাসু অস্তি স্বর্গ মুক্তি মোক্ষদ্বারম্।   অন্যতোऽস্য অধোগতিঃ নরকোऽথ শ্মশানম্।   ধন্যং হি মানবীয়ং জন্ম, দেবযোনিভ্যঃ শ্রেষ্ঠতরম্॥ ★ দেহাত্মবিবেকঃ আত্মা প্রাণস্বরূপোऽয়ং তেজোরূপঃ সনাতনঃ। জীবানাং প্রেরকঃ শক্তিঃ দেহস্তস্য নিবেশনম্॥ মৃণ্ময়ঃ কেবলো দেহো বসত্যত্রাত্মনা ক্ষণম্। সুশোভিতো দৃঢ়ো বাপি ন স এব নিবাসকঃ॥ ন গৃহস্য গৃহিণা সার্ধং নিত্যসম্বন্ধ ঈক্ষ্যতে। তথা দেহাত্মনোর্ভেদঃ স্পষ্ট এব বিবেকিনাম্॥ ন দেহঃ পুরুষং করোতি ন গুণান্ ন চ দোষকান্। আত্মৈব কারণং তেষাং দেহঃ মৌনং কেবলম্॥ 💧 পরমধাম প্রাপ্তিঃ পরং ধাম লভেত্যেব কামনার্থবিবর্জিতঃ । ত্যক্তস্বজনবন্ধশ্চ শ্রীনাথং শরণং গতঃ ॥ ভজনৈঃ কীর্তনৈর্নিত্যং যঃ স্মরত্যখিলেশ্বরম্। স এব লভতে নূনং পরং পদং ধাম সনাতনম্॥ ভাগ্য...

শ্রী শ্রী মা কালী এবং তাঁর বিভিন্ন রূপের বর্ণনা ও তাঁর ধ্যানমন্ত্র।

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महामाया-स्तोत्रम् ध्यानम् कालीं कृपामयीं देवीं, नीलोत्पलनिभां प्रभाम्। त्रिनेत्रां मुण्डमालां च, ध्यायामि जगदम्बिकाम्॥ स्तोत्रम् १. ब्रह्मशक्तिरूपा ब्रह्माणी, महेश्वरीति या स्मृता। निर्मलाकुमारिरूपा, महावज्रैन्द्री तथा॥ २. उग्रा शिवदूती नीला, मुण्डमालाविभूषिता। तमोमयी सा नियतिः, चण्डिका चान्यथा स्मृता॥ ३. अम्बिका वैष्णवी चापि, महागौरी च कौशिकी। कात्यायनी च कमला, भुवनेश्वरी ललिता॥ ४. दशमहाविद्यारूपा, काल्याख्या या प्रसिद्धिता। नमामि तां महादेवीं, सर्वरूपां जगद्गुरुम्॥ ५. साैवैकैव सन्त्येव, तथापि नान्यरूपिणी। अनन्तशक्तिसम्पन्ना, मायाशक्तिरनामया॥ ६. भक्तस्य हृदये नित्यं, नार्याः चाङ्के विराजते। ब्रह्मणो वाणीस्वरूपा, देवशक्तिर्निरूपिता॥ ७. भयत्रासहरां देवीं, भक्तानुग्रहकारिणीम्। जपमाला धरां नित्यं, त्राहि मां चण्डिकेश्वरीम्॥ ८. दुर्गां दुर्गतिनाशाय, कालिकां कालविग्रहम्। तारिणीं तारकत्राणां, त्राहि मां तारिणी शुभे॥ ९. नीलसरस्वतीं वन्दे, मातङ्गीं रूपधारिणीम्। धूमावतीं च बगला, मातरं मातृमण्डले॥ १०. भुवनेशि जगन्माते, महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते। कृपया पाहि मां नित्यं, मायामोहनिवारिणि...

শ্রী শ্রী সরস্বতী ।

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সরস্বতী পূজা सरस्वती–स्तोत्रम्  ध्यानम् शुक्लां ब्रह्मविचाररूपिणीमम्बां वीणापुस्तकोज्ज्वलाम्। हंसारूढां कमलासनां चिरस्मेरां सरस्वतीं भावयेत्॥ स्तोत्रम् (१) विष्णोर्जिह्वाग्रबिन्दोत्थां ब्रह्मचिन्तानुसारिणीम्। लक्ष्मीपार्वत्यधिष्ठात्रीं सरस्वतीं नमाम्यहम्॥ (२) शुक्लवर्णां च वीणां च पुस्तकाक्षमलाधराम्। पीतवस्त्रां च वेण्याढ्यां हंसारूढां नमाम्यहम्॥ (३) श्रद्धारिद्ध्यादिसम्पन्नां कला-मेधा-प्रदायिनीम्। तुष्टिपोष्टिप्रभास्मृत्या युक्तां वाग्देवीं भजे सदा॥ (४) पञ्चाशद्वर्णसंयुक्तां बागीश्वर्यस्वरूपिणीम्। त्रिलोकज्ञानसम्पूर्णां ध्वनिरूपां नमाम्यहम्॥ (५) ज्ञानदा रामदा विद्या जगद्भारहराम्बिका। त्रिदेवीं महाबोधितां वन्दे सस्मितमन्दिराम्॥ फलश्रुतिः इदं स्तोत्रं यः पठति भक्त्या नित्यं समाहितः। विद्यां मेधां स्मृतिं शान्तिं कीर्तिं चैव स लभ्यते॥ बालो वा वृद्ध एवास्तु स्त्रियो वा पुरुषोऽपि वा। स्तोत्रस्यास्य प्रसादेन वाक्सिद्धिं लभते ध्रुवम्॥ ★ দেবী সরস্বতী: জ্ঞান, নির্মলতা ও সত্ত্বগুণের অধিষ্ঠাত্রী দেবী সরস্বতী হিন্দু ধর্মের এক মহান দেবী, যিনি বুদ্ধি, বিদ্যা, জ্ঞান, সংগীত ও শিল্পকলার ...